एनसीपी-कांग्रेस में उप-मुख्यमंत्री पद को लेकर टकराव की वजह क्या?

महाराष्ट्र में बीते कई हफ़्तों से ज़ारी राजनीतिक उठापटक के बाद आख़िरकार एनसीपी-कांग्रेस और शिवसेना के गठबंधन ने शनिवार को विधानसभा में अपना बहुमत सिद्ध कर दिया है.

उद्धव ठाकरे इस गठबंधन के नेता के तौर पर महाराष्ट्र के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले चुके हैं.

लेकिन इसके बाद भी इन तीनों दलों के बीच तनातनी की ख़बरें आ रही हैं.

इसका सबसे ताज़ा उदाहरण महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री पद को लेकर कांग्रेस और एनसीपी के बीच जारी तकरार है.

कांग्रेस महाराष्ट्र की नई सरकार में अपने किसी नेता को उप-मुख्यमंत्री बनाने पर अड़ी हुई है.

वहीं, एनसीपी इसके लिए तैयार नज़र नहीं आ रही है.

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इन दोनों दलों के बीच ये तकरार ठाकरे सरकार के लिए कोई संकट पैदा करेगी?

महाराष्ट्र की राजनीति को करीब से समझने वालीं वरिष्ठ पत्रकार सुजाता आनंदन इससे सहमत नज़र नहीं आती हैं.

आनंदन कहती हैं, "हाल ही में मेरी कांग्रेस के कुछ नेताओं के साथ बातचीत हुई. इस बातचीत में उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र में कांग्रेस को दोबारा से मजबूत स्थिति में लाने के लिए उन्हें कम से कम तीन साल सरकार में रहने की ज़रूरत है. ऐसे में मुझे नहीं लगता कि इन मुद्दों की वजह से महाराष्ट्र की नवगठित सरकार पर किसी तरह का ख़तरा आएगा."

"कांग्रेस को भी डिप्टी सीएम का पद चाहिए और एनसीपी को भी. पहले भी यही तय हुआ था कि दो डिप्टी सीएम होंगे और एक सीएम होगा. ऐसे में मुझे इसमें कोई टकराव की वजह नहीं दिखती है. आंध्र प्रदेश में भी पांच-पांच डिप्टी सीएम हैं. ऐसे में इसे लेकर टकराव नहीं होना चाहिए."

इंडियन एक्सप्रेस में छपी ख़बर के मुताबिक़, एनसीपी नेता अजित पवार ने भी हाल ही में कहा है कि 27 नवंबर को तय हुए फॉर्मूले के लिहाज़ से ही आगे कोई बात होगी.

उन्होंने कहा था, "इस मामले में ये तय किया गया है कि कांग्रेस को स्पीकर का पद मिलेगा और एनसीपी को उप-मुख्यमंत्री का पद मिलेगा."

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि उप-मुख्यमंत्री पद को लेकर तीनों दलों के बीच आपसी सहमति बनने के बाद विभागों के बंटवारे को लेकर तनातनी का दौर सामने आने की आशंका है.

वरिष्ठ पत्रकार सुजाता आनंदन इससे सहमत नज़र आती हैं.

आनंदन बताती हैं, "उप-मुख्यमंत्री पद को लेकर जो तनातनी चल रही है, ये दरअसल आने वाले दिनों की तैयारी है. अगले कुछ समय में तीनों पार्टियों के बीच महाराष्ट्र सरकार के अलग-अलग विभागों का बंटवारा होना है."

"इन विभागों में शहरी विकास मंत्रालय, ग्राम विकास मंत्रालय और सहकारी विभाग को लेकर तनातनी देखने को मिलेगी. इसमें से शहरी विकास मंत्रालय पर तो कोई समस्या नहीं होगी क्योंकि शिव सेना इसे अपने अधिकार में लेना चाहेगी. क्योंकि वह मूलत: शहरों की पार्टी है."

"लेकिन ग्राम विकास मंत्रालय, सहकारी विभाग और गृह मंत्रालय को लेकर एनसीपी के बीच टकराव हो सकता है. क्योंकि ग्राम विकास मंत्रालय कांग्रेस और एनसीपी दोनों के लिए अहम है. अगर कांग्रेस को आने वाले समय में महाराष्ट्र के गांवों तक अपनी पैठ बनानी है तो इसके लिए उसे ये मंत्रालय हासिल करना होगा. यही बात एनसीपी के साथ भी लागू होती है."

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